Hyperloop story
अबतक आपने जापान की बुलेट ट्रैन के बारे में पढ़ा ,सुना और कई लोगो ने तो देखा भी होगा जिसकी गति 600 किलोमीटर प्रति घंटा होती है पर क्या आप उससे भी तेज गति वाले साधन की कल्पना कर सकते है ,तो कई लोग हवाई जहाज की बात करंगे ,पर यहाँ हम ट्रैन जैसे साधन की बात कर रहे है, जिसकी गति 1000 किलोमीटर प्रति घंटा संभव है ,और ये साधन है -hyperloop,
Hyperloop का विचार पहली बार कैसे आया?
हाइपरलूप जैसी तकनीक की जड़ें 1800 के दशक तक जाती हैं। उस समय कुछ वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने वैक्यूम ट्यूब में कैप्सूल चलाने की कल्पना की थी, लेकिन उस ज़माने की टेक्नोलॉजी उस विचार को हकीकत में बदलने से कोसो दूर थी| 1904 में प्रसिद्ध रॉकेट वैज्ञानिक रॉबर्ट गॉडार्ड ने पाइप के अंदर एक उच्च गति वाली ट्रेन का आईडिया दिया था ,जो लो-प्रेशर टनल में चले। इस तरह के साधन को उन्होंने “Vacuum train”निर्वात ट्रैन कहा था।
हाइपरलूप को वास्तव में वैश्विक मंच पर लाने का श्रेय एलन मस्क (Elon Musk) को जाता है। एलोन मस्क ने 2013 में एक श्वेतपत्र(White Paper) जारी किया जिसका नाम उन्होंने hyperloop alpha रखा , उन्होंने एक ऐसी परिवहन प्रणाली का प्रस्ताव दिया जोवैक्यूम ट्यूब में चलेगी,और 1000+ किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी,मैग्नेटिक लेविटेशन और इलेक्ट्रिक मोटर का उपयोग करेगी,विमान और हाई-स्पीड रेल से तेज़, सस्ता और साफ़-सुथरा विकल्प बनेगी| एलन मस्क का यह विचार लॉस एंजेलेस से सैन फ्रांसिस्कोके बीच यात्रा को तेज़ बनाने के लिए सोचा गया था |हालाँकि एलन मस्क ने खुद से Hyperloop को बनाने का दावा नहीं किया, लेकिन उन्होंने यह विचार ओपन-सोर्स कर दिया ताकि दुनिया भर की कंपनियाँ और इंजीनियर इसे आगे बढ़ा सकें।

क्या है हाइपरलूप?
हाइपरलूप (Hyperloop) एक अत्याधुनिक परिवहन प्रणाली साधन है जिसे पहली बार 2013 में एलन मस्क (Elon Musk) ने लोकप्रिय बनाया। इसका मकसद यात्रियों और सामान को बहुत तेज़ गति से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना है, जो ऊर्जा और समय दोनों की बचत करेगा
इस तकनीक में एक ट्यूबनुमा संरचना होती है, जिसके अंदर कम दबाव (vacuum या near-vacuum) का वातावरण होता है। इसमें एक कैप्सूल (pod) हवा में तैरते हुए (magnetic levitation की मदद से) चलती है और इसे एक शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर से बहुत तेज़ गति से आगे बढ़ाया जाता है।
hyperloop कैसे काम करता है
1 -Low Pressure Tube (कम दाब वाली ट्यूब)
ट्यूब के अंदर हवा नहीं होती,निर्वात होता है जिससे वायुगतिकीय घर्षण (air resistance) न के बराबर होता है। इससे कैप्सूल बहुत तेज़ गति से आगे की और गति कर सकती है।
2 -मैग्नेटिक लेविटेशन (Maglev)
कैप्सूल को पटरी से ऊपर रखा जाता है इससे घर्षण न हो। इससे कैप्सूल बिना रुकावट के फिसलती है।
3 -Linear Electric Motor (रेखीय विद्युत मोटर)
कैप्सूल को आगे बढ़ाने के लिए मोटर का प्रयोग होता है, जो बिना पहियों के अत्यधिक तेज़ी से गति देती है।
4 -Pods (कैप्सूल या पॉड्स)
ये वो डिब्बे होते हैं जिनमें यात्री या सामान मौजूद होते हैं। इनका डिज़ाइन एयरोडायनामिक होगा|
हाइपरलूप का भविष्य व फायदे:
-अत्यधिक तेज़ गति: 1000 किमी/घंटा तक।
-पर्यावरण के अनुकूल: बिजली से चलता है, प्रदूषण नहीं करता।
-ऊर्जा की बचत: पारंपरिक ट्रेनों और विमानों से कम ऊर्जा उपयोग करता है।
-यात्री सुविधा: कम समय में यात्रा, भीड़ से मुक्ति।
चुनौतियाँ:
-उच्च लागत: ट्यूब और टेक्नोलॉजी बनाने में भारी खर्च।
-सुरक्षा चिंताएं: तकनीक नई है, बड़े स्तर पर टेस्टिंग की ज़रूरत।
-नियम और कानून: सरकारों को नई नीतियाँ बनानी होंगी।
-सामाजिक स्वीकार्यता: लोगों को इसे अपनाने में समय लग सकता है
भारत और हाइपरलूप
भारत में भी हाइपरलूप को लेकर चर्चाएँ चल रही हैं। मुंबई से पुणे के बीच एक प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जिससे मात्र 25 मिनट में
यात्रा हो सकती है जो अभी करीब 3 घंटे लगते हैं। महाराष्ट्र सरकार और कुछ निजी कंपनियाँ इस प्रोजेक्ट में रुचि दिखा रही हैं।
हाइपरलूप तकनीक आने वाले समय में हमारी यात्रा करने के तरीके को पूरी तरह से बदल सकता है। अगर यह व्यावहारिक रूपसे सफल होता है, तो यह रेलवे और हवाई यात्रा का एक बेहतर विकल्प बन सकती है। यह न सिर्फ तेज़ होगा, बल्कि स्वच्छ, सुरक्षितऔर ऊर्जा-कुशल भी होगा।फिलहाल यह तकनीक परीक्षण चरण में है, लेकिन अगले 10 वर्षों में हम इसे कुछ खास क्षेत्रों में उपयोगहोते देख सकते हैं।
