(Bindi) बिंदी का महत्व
Bindi — यह छोटा सी रंग-बिरंगी बिंदी जो माथे पर लगाई जाती है — सिर्फ़ एक फैशन का हिस्सा नहीं है,बल्कि यह
संस्कृति, इतिहास और विज्ञान से भरपूर एक गहरा प्रतीक है। “Bindi” शब्द संस्कृत के “बिंदु” शब्द से आया है, जिसका
अर्थ होता है “बिंदु” या “बिंदु मात्र”। लेकिन यह सिर्फ़ कोई साधारण बिंदु नहीं है — यह भारतीय परंपराओं में अत्यंत
महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
अनेक संस्कृतियों में यह आत्मिक जागरूकता का प्रतीक माना जाता है और इसे “तीसरी आँख” से जोड़ा जाता है, जो
ज्ञान और अंतर्ज्ञान का केंद्र मानी जाती है। बिंदी को ईश्वरीय ऊर्जा से जुड़ाव और आंतरिक शक्ति का प्रतीक माना जाता
है। समय के साथ यह साधारण सा प्रतीक कई रूपों में विकसित हुआ है और आज भी अपने गहरे अर्थ को संजोए हुए है।
चलिए अब मूल बातों से शुरू करते हैं: (Bindi) की जड़ें हिंदू संस्कृति में गहराई से जुड़ी हुई हैं। पारंपरिक रूप से यह “तीसरी
आँख” का प्रतीक मानी जाती है, जो हमारे माथे के बीचों बीच स्थित होती है। यह स्थान शरीर के ऊर्जा केंद्रों में से एक माना
जाता है, जिसे “आज्ञा चक्र” या “भ्रू चक्र” कहा जाता है। यह चक्र अंतर्ज्ञान, ज्ञान और आध्यात्मिक दृष्टि से जुड़ा होता है।
Bindi पहनना उस दिव्यता से जुड़े होने का एक तरीका माना गया है, और समय के साथ यह शुभता, समृद्धि और आध्यात्मिक
कृपा का प्रतीक बन गया। यह एक छोटा सा बिंदु है, लेकिन इसके पीछे छिपा अर्थ बेहद विशाल और गहरा है।
आध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ, बिंदी का सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष महत्व है। विवाहित महिलाएं अक्सर
बिंदी का उपयोग अपने वैवाहिक स्थिति को दर्शाने के लिए करती हैं, जैसे कि पश्चिमी देशों में विवाह की अंगूठी का चलन है।
खासकर लाल बिंदी का संबंध देवी शक्ति से होता है, जो प्रेम, प्रजनन क्षमता और सुरक्षा की प्रतीक मानी जाती हैं,वहीं, छोटी
लड़कियां रंग-बिरंगी या सजावटी बिंदियां पहनती हैं,जो परंपरा का हल्का-फुल्का और सुंदर रूप प्रस्तुत करती हैं।
एक स्टाइलिश स्पर्श
Bindi की जड़ें भले ही परंपराओं में हों, लेकिन आज यह एक ट्रेंडी फैशन एक्सेसरी भी बन चुकी है। अब बाजार में बिंदियां कई
रंगों, आकारों और डिज़ाइनों में उपलब्ध हैं, जिन्हें परिधानों से मेल खाते हुए पहना जाता है ताकि लुक में चमक और आकर्षण
जोड़ा जा सके। फैशन डिज़ाइनर्स ने भी बिंदी को अपनाया है, जिससे यह न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में लोकप्रिय हो
गई है।
Bindi की खासियत उसकी बहु-उपयोगिता (versatility) में है — चाहे वह एक साधारण बिंदु हो, कीमती पत्थर से जड़ी हो, या
जटिल डिज़ाइन वाली हो, यह उतनी ही सादी या भव्य हो सकती है, जितना पहनने वाला चाहता है। कई लोगों के लिए यह
अपनी संस्कृति से जुड़े रहने के साथ-साथ अपनी व्यक्तिगत पहचान और स्टाइल को दिखाने का भी तरीका है।
वैदिक युग से आज तक: बिंदी का सफर
वैदिक काल में बिंदी को ‘तिलक’ कहा जाता था और यह धार्मिक अनुष्ठानों में ईश्वरीय आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में लगाया
जाता था। यह आज्ञा चक्र यानी तीसरी आँख पर लगाया जाता था, जिसे अंतर्ज्ञान और आध्यात्मिक दृष्टि का केंद्र माना जाता है।
आज भी बिंदी पहनना न केवल सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है। माना जाता है कि यह:
सिरदर्द को कम करने,साइनस की समस्या दूर करने,दृष्टि, त्वचा और श्रवण स्वास्थ्य में सुधार,तनाव घटाने,एकाग्रता बढ़ाने,
याददाश्त मजबूत करने में सहायक होती है। बिंदी माथे पर हल्का दबाव डालती है, जिससे शरीर में ऊर्जा प्रवाह संतुलित होता
है और मानसिक स्पष्टता व भावनात्मक संतुलन प्राप्त होता है।
सांस्कृतिक विकास और आधुनिक उपयोग
जैसे-जैसे दुनिया जुड़ती जा रही है, बिंदी अब सांस्कृतिक सीमाओं को पार कर चुकी है। आज यह विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोग
अपनाते हैं — विशेष रूप से पश्चिमी देशों में, जहां इसे एक बोहेमियन स्टाइल या आध्यात्मिकता के प्रतीक के रूप में देखा
जाता है।
बॉलीवुड फिल्मों और पॉप कल्चर ने भी (Bindi) बिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बना दिया है।
उदाहरण के लिए, सेलेना गोमेज़ ने अपने गाने “Come and Get It” में बिंदी पहनी थी और भारतीय शास्त्रीय संगीत को पृष्ठ
भूमि में इस्तेमाल किया, जिससे इसकी सांस्कृतिक सुंदरता और गहराई को वैश्विक मंच पर पहचान मिली।तो भारतीय महिलाएं
बिंदी क्यों लगाती हैं?
यह केवल फैशन की बात नहीं है, बल्कि यह एक समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को अपनाने की बात है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा से
जोड़ती है स्वास्थ्य लाभ देती है.सौंदर्य और पहचान को निखारती है
चाहे वह एक साधारण बिंदु हो या रंग-बिरंगी डिज़ाइन, बिंदी (Bindi) एक अर्थपूर्ण निशान है — जो इतिहास, परंपरा और आधुनिकता का संगम है।
