Project Waterworth Explained: Meta’s Ambitious Plan to Dominate AI-Era Global Data Transfer

"PROJECT WATERWORTH"

PROJECT WATERWORTH

यह उन प्रयासों मेसे एक है जिसमे बड़ी टेक कम्पनीज इंटरनेट के “पाइप्स”यानि इंटटर्नटे पर अधिक नियंत्रड
पाने की कोशिश कर रही है ,खास कर एडवांस AI के बढ़ते डाटा डिमांड की चलते इस प्रोजेक्ट को लॉन्च
किआ गया गया है हलाकि मेटा ने इस केबल की सटीक लोकेशन को साझा नहीं किआ है लेकिन एक ग्राफ़िकको साझा किआ है यह केबल अमेरिका के पूर्वी तट से शुरू होती है और दक्षिण अमेरिका की और जाती हुईअटलांटिक महासागर को पार करती है और भारत से गुजर कर अमेरिका के पश्चिमी तट तक पहुँचती है

Meta ने एक महत्वकांशी परियोजना “प्रोजेक्ट वाटरवर्थ “की घोषणा की जिसका उद्देश्य 31000 मील लम्बी SUBSEA INTERNET CABLE बनाना है जब यह परियोजना पुरी होजाएगी ,तब यह विशाल केबल अमेरिका
,ब्राज़ील ,दक्षिण अफ्रीका ,भारत और इसके मार्ग में आने वाले अन्य क्षेत्र को जोड़ेगी। इसकी लम्बाई पृथ्वी कीपरिधि से भी अधिक है

हलाकि PROJECT WATERWORTH की लागत का कोई सटीक आंकड़ा नहीं है पर TECHCRUNCH
की रिपोर्ट के अनुसार मेटा SUBSEA CABLE PROJECT पर 10 बिलियन डॉलर खर्च करने की योजना बना रहा है , मेटा के अनुसार इस दशक के अंत तक इस प्रोजेक्ट के पूरा होने की उम्मीद है

हलाकि यह पहली बार नहीं है जब मेटा SUBSEA CONNECTIVITY के क्षेत्र में कदम रख रहा है मेटा पिछले२० दशक में अलग अलग प्रोजेक्ट में हिस्सेदार रही है हलाकि इस प्रोजेक्ट को AI को ध्यान म रख कर बनाया जा रहा है।अभी तक subsea केबल में 8 -16 pair फाइबर केबल का उपयोग किआ जाता रहा है पर मेटा 24 pair फाइबर केबल का उपयोग करेगा ,जो डाटा इंटेंसिव प्रोजेक्ट AI के लिए उपयोगी सिद्ध
होगा।

AI के भविष्य को सँभालने में Project Waterworth की महत्वपूर्ण भमिका होगी ,हलाकि की मेटा का प्रोजेक्ट यह बतात है की बड़ी टेक कंपनी डाटा प्रोसेस तक सिमित न रहकर इंटरनेट इंफ़्रा में भी
नियंत्रड के लिए आगे आ रहीं हैं
जैसे-जैसे AI दुनिया के उद्योगों और समाज में बदलाव ला रहा है,यह साफ है कि मजबूती के साथ वैश्विक
पहुंच कहीं ज़्यादा जरूरी हो गई है जिससे एक अग्रणी इन्फ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट किया जा सके,— ऐसा कहा
Meta के नेटवर्क एक्जीक्यूटिव्स नागराजन और एम Aimé ने एक इंटरव्यूज के दौरान

Meta न केवल इस मेगाप्रोजेक्ट को तैयार कर रहा है, बल्कि वह अपने निवेश को प्राकृतिक और मानवीय
खतरों से बचाने के लिए भी उपाय कर रहा है। कंपनी का कहना है कि वह इस केबल को 7,000 मीटर की
गहराई तक बिछाएगी और एन्हांस्ड बरीअल टेक्निक्स (उन्नत गहराई पर दबाने की तकनीक) का उपयोग करेगी,ताकि शिप एंकर और अन्य खतरों से केबल को नुकसान न पहुंचे ।

इन केबल्स को होने वाला अनचाहा नुकसान बड़ी चिंता है। इसी साल जनवरी में NATO ने बाल्टिक सागर से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी बढ़ाने की एक पहल शुरू की, जब कुछ संदिग्ध घटनाओं में जहाजों लंगरों ने केबल को क्षति पहुँचाई और नेटवर्क बंद हो गया।यह केवल मानव गतिविधियां ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदाएँ और शार्क भी इन केबल्स को नुकसान पहुँचा सकती हैं।

इसीलिए, Meta इन खतरों को ध्यान में रखते हुए अपने SUBSEA INTERNET CABLE को ज्यादा सुरक्षित और (PROJECT WATERWORTH) टिकाऊ बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

PROJECT WATERWORTH एक भिन्न दृश्टिकोण


जब यह परियोजना पूरी हो जाएगी, तो Meta का कहना है कि Project Waterworth उन देशों के बीच वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दे सकता है जो इस नेटवर्क से जुड़े होंगे, और विशेष रूप से कम आय वाले क्षेत्रों में आर्थिक विकास को तेज़ कर सकता है जो इसके मार्ग में स्थित हैं। कम से कम कुछ देशों ने इस परियोजना को आशावादी भी है। इस हफ्ते, अमेरिका और भारत ने एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें इस पहल की सराहना की गई। दोनों देशों का मानना है कि यह परियोजना “भारतीय महासागर क्षेत्र और उससे आगे वैश्विक डिजिटल हाईवे को मज़बूत” करने में मदद मिलेगी

बयान में कहा गया:”भारत का इरादा है कि वह भारतीय महासागर में सबसी केबल्स के रखरखाव, मरम्मत और फाइनेंसिंग में निवेश करेगा, और इसके लिए भरोसेमंद वेंडर्स का इस्तेमाल करेगा।”
इस तरह, Project Waterworth न केवल तकनीकी दृष्टिकोण से एक क्रांतिकारी कदम है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग, डिजिटल समावेशन, और क्षेत्रीय विकास को भी गति देने का एक प्रभावशाली जरिया बन सकता है।

AI की तैयारी के बीच, सबसी केबल्स में बड़ा निवेश कर रहीं अमेरिकी टेक कंपनियाँ

Meta अकेली कंपनी नहीं है जो समुद्र के नीचे केबल नेटवर्क पर भारी निवेश कर रही है। पिछले साल Google ने घोषणा की थी कि वह $1 बिलियन से अधिक खर्च करेगा ताकि अमेरिका और जापान के बीच और अन्य प्रशांत क्षेत्रों में नई फाइबर केबल्स बिछाई जा सकें। Google ने ऑस्ट्रेलिया के चारों ओर दो नई केबल परियोजनाओं पर भी काम शुरू कर दिया है।
Amazon भी अब इंटरनेट इन्फ्रास्ट्रक्चर में अधिक सक्रिय हो गया है, और रिपोर्ट्स के अनुसार वह अमेरिका से आयरलैंड के बीच एक नई ट्रांस-अटलांटिक फाइबर केबल बनाने की योजना पर काम कर रहा है।

2024 तक सबसी केबल्स में क्लाउड कंपनियों का वर्चस्व

रिसर्च ग्रुप TeleGeography के अनुसार, 2024 के अंत तक Meta, Microsoft, Google औरAmazon जैसी कंपनियाँ और अन्य क्लाउड सेवा प्रदाता 60 से अधिक सबसी केबल प्रोजेक्ट्स में शामिल हो चुके हैं — जो2017 में सिर्फ 20 के आसपास थे।
2018 तक, Google, Facebook (अब Meta), Amazon और Microsoft जैसे कंटेंट प्रोवाइडर्स ने या तो सबसी बैंडविड्थ का आधा से अधिक हिस्सा खरीदा या लीज़ पर लिया था।

भविष्य में और तेजी से बढ़ेगा यह ट्रेंड(PROJECT WATERWORTH)

Analysys Mason, एक वैश्विक टेक कंसल्टिंग फर्म, ने हाल ही में 2024 का पूर्वानुमान जारी किया, जिसके
अनुसार वैश्विक सबमरीन फाइबर-ऑप्टिक टेलिकॉम केबल मार्केट 2023 में $7.96 बिलियन से बढ़कर 2029 तक $9.8 बिलियन हो जाएगा। इस ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा Meta जैसी “Hyperscaler” कंपनियों से आएगा।

इस ग्रोथ को AI मॉडल्स से संबंधित डेटा की बढ़ती मांग आगे बढ़ा रही है। दुनियाभर के देश अब ऐसी विशाल डेटा और अन्य फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दौड़ में हैं, जो AI और क्लाउड कंप्यूटिंग को सपोर्ट कर सकें।लेकिन अगर पूरी दुनिया में डेटा को ट्रांसमिट करने के लिए पर्याप्त फाइबर क्षमता नहीं होगी, तो यह पूरी तकनीकी क्रांति अधूरी रह जाएगी।


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